Kavita Jha

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बेचारा पति #दैनिक कविता लेखनी प्रतियोगिता -03-Jun-2022

सृजन शब्द- बेचारा
दोहा- हास्य रस
स्थाई भाव-हास
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कोल्हू बैल समान ही, करता दिन भर काम।
झाड़ू पोछा भी करे,बेचारा पति आम।।

पत्नी टीवी देखती, दबा रहा पति पैर।
 चाय बना लाना पिया , करना फिर है सैर।।

रौब जमाती बोलती, आज पकाओ खास।
बेचारा वो क्या करे, जाए किसके पास।।

किससे बातें हो रही, हंसे क्यों थे आप।
शक्की पत्नी टोकती, बेचारा कर जाप।।

शादी कर पछता रहा, सूझे नहीं उपाय।
पत्नी सेवा में लगा, बेचारा पति हाय।।
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कविता झा'काव्या कवि'
# लेखनी
## लेखनी दैनिक काव्य प्रतियोगिता
03.05.2022 हम

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8 Comments

Seema Priyadarshini sahay

04-Jun-2022 06:00 PM

😅बेचारे पति की बेहाल व्यथा👌👌

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Punam verma

04-Jun-2022 09:18 AM

Nice

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Abhinav ji

04-Jun-2022 08:42 AM

Nice

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